लखनऊ में फर्जी कॉल सेंटर का बड़ा भंडाफोड़ हुआ है। राजधानी की चर्चित समिट बिल्डिंग में चल रहे इस अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का पुलिस ने पर्दाफाश किया है। यह गिरोह विदेशी नागरिकों को निशाना बनाकर ठगी को अंजाम दे रहा था।
कैसे चल रहा था पूरा नेटवर्क
जानकारी के मुताबिक यह कॉल सेंटर पूरी तरह प्रोफेशनल तरीके से चलाया जा रहा था। आधुनिक कंप्यूटर सिस्टम, हाई-स्पीड इंटरनेट और इंटरनेट कॉलिंग के जरिए विदेशी नागरिकों से संपर्क किया जाता था। कॉल करने वाले खुद को नामी कंपनियों का प्रतिनिधि बताकर लोगों को झांसे में लेते थे।
लखनऊ में फर्जी कॉल सेंटर कैसे चलाया जा रहा था
पुलिस की छापेमारी के दौरान मौके से बड़ी संख्या में कंप्यूटर, लैपटॉप, मोबाइल फोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस बरामद किए गए हैं। इसके अलावा कई अहम दस्तावेज भी पुलिस के हाथ लगे हैं, जिनकी जांच की जा रही है।
साइबर सेल कर रही फॉरेंसिक जांच
पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस नेटवर्क के तार कहां-कहां तक जुड़े हैं और अब तक कितने लोगों को ठगी का शिकार बनाया गया है। साइबर सेल की टीम बरामद कंप्यूटरों और मोबाइल फोन के डेटा की फॉरेंसिक जांच कर रही है। शुरुआती जांच में करोड़ों की ठगी की आशंका जताई जा रही है।
यूपी में तेजी से बढ़ रहे साइबर अपराध
उत्तर प्रदेश में साइबर अपराध के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। फर्जी कॉल सेंटर, डिजिटल अरेस्ट, सेक्सटॉर्शन और फिशिंग जैसे मामलों में पिछले कुछ वर्षों में तेज बढ़ोतरी देखी गई है। पुलिस लगातार ऐसे गिरोहों पर शिकंजा कस रही है।
आप कैसे बचें — पुलिस की अपील
पुलिस ने आम लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान कॉल पर अपनी बैंकिंग जानकारी, OTP या पर्सनल डिटेल साझा न करें। कोई भी सरकारी एजेंसी या बैंक फोन पर OTP नहीं मांगता। ठगी होने पर तुरंत 1930 (साइबर हेल्पलाइन) पर कॉल करें या cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें।
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