UP Smart Meter: उत्तरप्रदेश में बिजली उपभोक्ताओं के सामने के बड़ी मुसीबत सामने आई है। यूपी के करीब पौने दो लाख स्मार्ट इलेक्ट्रिसिटी मीटर नेटवर्क से बाहर हो गए हैं। जिससे बिजली खपत की सूचना उपभोक्ताओं के सामने नहीं आ रही है।
स्मार्ट मीटर की समस्याओं पर खबर लहरिया ने बिहार, उत्तरप्रदेश और छत्तीसगढ़ में ग्राउंड रिपोर्टिंग की थी। उस समय बिजली स्मार्ट मीटर को लेकर लोगों का कहना था कि बिल बढ़ कर आ रही है, तेजी से बैलेंस में कटौती हो रही है गलत रीडिंग वाली भी समस्या थी।
क्या है UP Smart Meter का पूरा मामला
उत्तरप्रदेश के बिजली उपभोक्ताओं के सामने नई समस्या आ गई है। राज्य में बड़ी संख्या में स्मार्ट मीटर लगाए गए हैं, आंकड़ों के मुताबिक, 92.90 लाख मीटर लगाए जा चुके हैं। परन्तु, उसमें से राज्य के करीब पौने दो लाख मीटर संचार से बाहर हैं। ठोस संख्या की बात करें तो 1 लाख 73 हजार 163 सम मीटर उपभोक्ताओं की समस्या ये है कि उन्हें वास्तविक बिजली खपत का पता नहीं चल पा रहा है।

उपभोक्ताओं की परेशानियां
यूपी में ग्राहकों के मंजूरी बिना ही स्मार्ट प्रीपेड सम मीटर लगा दिए गए हैं। जिससे कई लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था। बैलेंस अचानक खत्म होने पर बिजली चली जाती थी, रिचार्ज करने के बाद भी बिजली टाइम पे नहीं आती थी। अब समस्या का निवारण कर दिया गया है, प्रीपेड से पोस्टपेड कर दिया गया है।
अभी की समस्या ये है कि 1 लाख 73 हजार 163 स्मार्ट मीटर के संचार के बाहर हो जाने से वास्तविक रकम का पता नहीं चल रहा है।
क्या बिजली बिल पर पड़ेगा असर?
स्मार्ट मीटर के नेटवर्क से बाहर जाने पर बिजली बिल या खपत पर कोई असर नहीं पड़ेगा। नेटवर्क न होने पर भी स्मार्ट मीटर आपके घर की बिजली की खपत को लगातार अपने इंटरनल मोमोरी में रिकॉर्ड करता है, नेटवर्क में आने के बाद सारा देता बिजली कंपनी के सर्वर को भेज देता है।
नेटवर्क करने से आपकी बिजली की सप्लाई बंद नहीं होती, यह पुराने मीटर की तरह ही सामान्य रूप से चलती है।
उपभोक्ता परिषद् की कार्रवाई
उपभोक्ता परिषद् ने कहा कि पावर कार्पोरेशन पूरी स्मार्ट मीटर परियोजना की स्वतंत्र व तकनीकी जांच करवाए। परिषद् की मांग है, की नेटवर्क से बाहर जाने की वजह का पता लगाया जाए।
उपभोक्ता परिषद् के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि इससे बिलिंग, राजस्व प्रबंधन, तकनीकी निगरानी व उपभोक्ता शिकायतों के समाधान में समस्या आएगी। अगर इसे दुरुस्त नहीं किया जा सकता तो परियोजना को बंद कर देना चाहिए, वरना पावर कार्पोरेशन को नुकसान होगा और भार उपभोक्ताओं पर पड़ेगा।
बड़ी संख्या में स्मार्ट मीटर लगाने से परियोजना सफल नहीं होगी बल्कि, मीटरों के प्रभावी, निर्बाध और विश्वशनीय संचालन से सफल होगा।