संग्रहालय के माध्यम से श्रद्धालु करेंगे भगवान राम की यात्रा का अनुभव
अयोध्या में 100 करोड़ की लागत से बनने जा रहा है रामकथा म्यूजियम। राम मंदिर निर्माण समिति के चेयरमैन नृपेंद्र मिश्रा ने रविवार को दो दिवसीय बैठक की प्रगति के बारे में बताया। राम कथा संग्रहालय का निर्माण 2015 में 12.31 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किया गया था। एक मंजिला भवन में 18 कमरे हैं, जो 3 एकड़ भूमि में फैला हुआ है। पुराने राम कथा संग्रहालय को अब इंटरनेशनल म्यूजियम के रूप में बदला जाएगा, जिसके लिए 100 करोड़ रूपए की लागत का अनुमान लगाया गया है। अगले एक साल में निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा।
म्यूजियम बनाने की पृष्ठभूमि:
आरंभ से ही, राम मंदिर ट्रस्ट ने मंदिर परिसर में मंदिर के साथ-साथ एक संग्रहालय बनाने की योजना बनाई थी। सुरक्षा मानकों को ध्यान में रखकर इसे रद्द कर दिया गया था। 2020 में मंदिर की नींव रखते समय कई कलाकृतियाँ, रामायण से संबंधित आवश्यक वस्तुएं मिली, जिसे संग्रहालय में प्रदर्शित करने की ट्रस्ट की मनोकामना थी। रविवार को ट्रस्ट के चेयरमैन नृपेंद्र मिश्रा ने कहा अगले एक वर्ष में निर्माण कार्य पूरा करने का निर्णय लिया गया है। म्यूजियम बनाने के लिये 100 करोड़ रुपए की लागत का अनुमान तय किया गया है।

म्यूजियम में क्या होगा खास :
म्यूजियम में भगवान राम के वनगमन से जुड़ी देश की प्रमुख नदियों को प्रदर्शित किया जाएगा। इसमें 7डी तकनीकी और डिजिटल गैलरी के जरिए रामायण को जीवन कर दिया जाएगा। कहानियों के किरदारों को बिल्कुल असली जीवन के समान हम देख पाएंगे। भगवान राम के 63 पीढ़ियों का इतिहास (इक्ष्वाकु वंश का पूर्ण इतिहास) डिजिटल गैलरी में देख पाएंगे। वर्षों पुरानी रामायण की दुर्लभ पांडुलिपियाँ, राम मंदिर के आंदोलन का इतिहास आदि दस्तावेजों को भी प्रदर्शित किया जाएगा। इसके साथ गुप्तकालीन वस्तुओं को भी संरक्षित किया जाएगा। इक्ष्वाकु वंश गैलरी में 7डी तकनीकी के माध्यम से 63 पीढिय़ों के बारे में बताया जाएगा, वही प्रभु चरण गैलरी में भगवान राम के अवतरण, वनगमन, कहां किससे भेंट हुई और मुख्य पड़ावों को विस्तारित किया जाएगा। एक दीवार पर वनगमन के दौरान कहां-कहां रुके और क्या संदेश दिए इसका भी वर्णन, स्क्रिप्ट पर होगा। इसकी शुरुआत सरयू नदी से होगी और समापन गुप्तार घाट पर होगा। इन सभी के बीच एक विश्राम कक्ष होगा, जिसमें जलपान आदि की व्यवस्था होगी।
ट्रस्ट के द्वारा होगा संचालन :
संचालन के लिए सीईओ की नियुक्ति होगी। जिसे ट्रस्ट के निर्णय पर रखा जाएगा। ट्रस्ट के चेयरमैन नृपेंद्र मिश्रा के ये भी कहा कि मंदिर न्यास या इसके मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) के कामकाज में सरकार का कोई दखल या हस्तक्षेप नहीं होगा। सीईओ की भूमिका और अधिकारों का निर्धारण, श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट द्वारा किया जाएगा। मंदिर की समितियों, उपसमितियों, सीईओ की नियुक्ति, स्टाफ की नियुक्ति, सब पर ट्रस्ट की निगरानी तथा अंतिम निर्णय होगा।