बीजेपी की नई रणनीति, क्या योगी सरकार बना पाएगी हैट्रिक?
उत्तरप्रदेश में 2027 में विधानसभा चुनाव होना है। विधानसभा चुनावों से पहले BJP ने “प्रधानी फार्मूला”, मॉडल पर चुनावी अभियान केंद्रित करने का प्लान बनाया है। अगले 6 महीनों के बाद UP Politics एक नया मोड़ लेगी, देखना यह है क्या प्रधानी फार्मूला कामगार साबित होगी। आइए जानते हैं, क्या है प्रधानी फार्मूला और भाजपा ने इसे क्यों चुना है।
क्या है प्रधानी मॉडल
राजनीतिक विश्लेषकों और मीडिया द्वारा इस्तेमाल किया जाने वाला, वर्तमान में बहुचर्चित “प्रधानी मॉडल” अभी सुर्खियों में है। इस मॉडल का मतलब है, ग्राम चुनाव में जिस प्रकार ग्राम प्रधान (प्रधानी) का चुनावी अभियान, बेहद स्थानीय, व्यक्ति आधारित और बूथ-केंद्रित चुनाव होता है, उसी फार्मूला के आधार पर विधानसभा चुनाव की रणनीति तैयार करना।
इस मॉडल के अनुसार, रैलियों के बजाए, घर-घर संपर्क करना, स्थानीय नेटवर्क पर बल देना और प्रत्येक वोटर तक पहुंचना होता है।
इस मॉडल में नेता घर- घर संपर्क अभियान चलाते हैं, बूथ स्तर पर मजबूत संगठन बनाते हैं, स्थानीय पहचान तथा स्थानीय कार्यकर्ताओं से अच्छा पहचान बनाते हैं। माइक्रो मैनेजमेंट यानी गांव, वार्ड और बूथ के अनुसार चुनावी रणनीति बनाई जाती है। छोटे – छोटे जनसंपर्क कार्यक्रम रखें जाते हैं तथा चुनाव के दिन अधिकतम मतदान सुनिश्चित करने पर जोर दिया जाता है।
बीजेपी ने नहीं दिया है कोई आधिकारिक बयान
उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, भाजपा अध्यक्ष पंकज चौधरी और महामंत्री संगठन धर्मपाल सिंह कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने और चुनावी मोड में लाने के लिए जुटे हुए हैं। पार्टी ने प्रधानी मॉडल को लेकर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है, परन्तु राजनीतिक विश्लेषक और मीडिया, प्रधानी मॉडल को बीजेपी की रणनीति बता रही है।
पार्टी की रणनीति में क्या होंगे बड़े बदलाव
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, पार्टी द्वारा प्रधानी फार्मूला रणनीति को अपनाने पर कई बड़े लाभ पार्टी को मिल सकते हैं। जैसे – पार्टी की पहुंच हर घर तक जाएगी, माइक्रो मैनेजमेंट अच्छे से हो पाएगा, स्थानीय मुद्दों को प्राथमिकता मिलेगी तथा स्थानीय कार्यकर्ताओं की भूमिका बढ़ेगी। इससे अभियान और अधिक स्थानीय, संगठित और मतदान केंद्रित बनेगा।
विधानसभाओं में 22 जुलाई को सम्मेलन
22 जुलाई को विधानसभा क्षेत्रों में भाजपा बूथ सम्मेलन आयोजित करने जा रही है। इसके संयोजक प्रदेश महामंत्री दिलीप पटेल और सह संयोजक मंत्री शिव भूषण सिंह, राहुल वाल्मीकि को बनाया गया है।

महिला भागीदारी बढ़ाने कि तैयारी
वाराणसी भाजपा महिला मोर्चा की नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष सरोज कुशवाहा ने कार्यकर्ताओं को हर बूथ तक पहुंचने, महिला कार्यकर्ता को सक्रिय होने और सरकारी योजनाओं को हर घर पहुंचाने का आह्वान किया है। वहीं, विपक्ष पर कटाक्ष करते हुए सरोज कुशवाहा ने कहा – विपक्ष के पास महिला कार्यकर्ता नहीं है, उन्हें डर है कि अगर 33% प्रतिशत आरक्षण लागू हो गया, तो वे उम्मीदवार कहां से लाएंगे? वे सिर्फ अपने परिवार की महिलाओं को राजनीति में लाते हैं।
विपक्ष पर इसका क्या असर पड़ सकता है
प्रधानी फार्मूला बेहद मज़बूत और प्रभावशाली रणनीति है। अगर, बीजेपी इसे अपनाती है तो विपक्ष को भी स्थानीय स्तर पर सक्रिय होना होगा, संगठन मजबूत करने का दवाब भी बन सकता है। ऐसे में अगर विपक्ष ने भी जमीनी स्तर पर कार्य किया तो एक बहुत मजबूत चुनावी मुकाबला देखने को मिल सकता है।
क्या यह रणनीति 2027 के चुनाव में गेम चेंजर साबित होगी?
चुनाव का परिणाम कई कारणों पर आधारित होता हैI चुनावी सफलता केवल रणनीति नहीं बल्कि, उम्मीदवारों की लोकप्रियता, स्थानीय मुद्दा, सामाजिक समीकरण, विपक्ष की रणनीति, मतदाताओं के अंतिम फैसले आदि पर निर्भर करता है। प्रधानी फार्मूला UP politics में एक शार्प मूव हो सकता है परन्तु, इसका वास्तविक प्रभाव तो चुनावी नतीजों के बाद ही स्पष्ट होगा।
2022 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने बूथ मैनेजमेंट और पन्ना प्रमुख मॉडल पर विशेष बल दिया था। डबल इंजन सरकार, विकास कार्य और कानून व्यवस्था को प्रमुख मुद्दा बनाया था। कई योजनाओं के माध्यम से लाभार्थियों तक संपर्क किया और योगी आदित्यनाथ को प्रमुख चेहरा बनाया। वहीं विपक्ष में, अखिलेश यादव ने छोटे क्षेत्रियों दलों के साथ गठबंधन किया। महंगाई, बेरोजगारी, किसान, पेपर लीक आदि को मुद्दा बनाया तथा बीजेपी के खिलाफ स्थानीय असंतोष और एंटी इनकंबेंसी को चुनावी मुद्दा बनाने का प्रयास किया।